Pierre Bittar French Impressionist Artist  
 

 

 

अकतूबर 9, 2011

पेंटिंग नं. 12

सलीब पर चढ़ाना और मृत्यु

Crucification of Jesus Christ


John 19: 16-27
16 तब उसने उसे उनके हाथ सौंप दिया ताकि वह क्रूस पर चढ़ाया जाए।
17 तब वे यीशु को ले गए, और वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्थान तक बाहर गया, जो खोपड़ी का स्थान कहलाता है (इब्रानी में गुलगुता)
18 वहां उन्होंने उसे और उसके साथ और दो मनुष्यों को क्रूस पर चढ़ाया, एक को इधर और एक को उधर, और बीच में यीशु को।
19 और पीलातुस ने एक दोष-पत्र लिखकर क्रूस पर लगा दिया और उसमें यह लिखा हुआ था, यीशु नासरी यहूदियों का राजा।
20 यह दोष-पत्र बहुत यहूदियों ने पढ़ा क्योंकि वह स्थान जहां यीशु क्रूस पर चढ़ाया गया था नगर के पास था और पत्र इब्रानी ,लतीनी और यूनानी में लिखा हुआ था।
21 तब यहूदियों के महायाजकों ने पीलातुस से कहा, यहूदियों का राजा मत लिखो परन्तु यह कि “उसने कहा, मैं यहूदियों का राजा हूं”।
22 पीलातुस ने उत्तर दिया, कि मैंने जो लिख दिया, वह लिख दिया।
23 जब सिपाही यीशु को क्रूस पर चढ़ा चुके, तो उसके कपड़े लेकर चार भाग किया, हर सिपाही के लिये एक भाग और कुरता भी लिया, परन्तु कुरता बिनसीअन ऊपर से नीचे तक बुना हुआ था: इसलिये उन्होंने आपस में कहा, हम इसको कोने से फाडें, परन्तु इस पर चिट्ठी डालें कि वह किसका होगा।
24 “यह इसलिये हुआ, कि पवित्र शास्त्र की बात पूरी हो कि उन्होंने मेरे कपड़े आपस में बांट लिये और मेरे वस्त्र पर चिट्ठी डाली" सो सिपाहियों ने ऐसा ही किया।
25 परन्तु यीशु के क्रूस के पास उसकी माता और उसकी माता की बहिन मरियम, क्लोपास की पत्नी और मरियम मगदलीनी खड़ी थी।
26 यीशु ने अपनी माता और उस चेले को जिससे वह प्रेम रखता था, पास खड़े देखकर अपनी माता से कहा; हेनारी, देख, यह तेरा पुत्र है। *
27 तब उस चेले से कहा, यह तेरी माता है, और उसी समय से वह चेला, उसे अपने घर ले गया।

* यूनानी शब्द वूमैन किसी प्रकार का अलादर व्यक्त नहीं करता।

अपने पुत्र का मजाक उड़ाया जाना, उस पर अत्याचार किया जाना और अब अभी सूली पर चढ़ाया जाना देख कर मरियम का हृदय कितने दुख से भर गया होगा. एक बार फिर एक तलवार मरियम के हृदय के आर-पार होती है, मंदिर में सिमेयोन द्वारा की गई भविष्यवाणी का शब्द (लूकस 2:35)।

योहन 19:26-27 दो कारणों से एक बहुत महत्वपूर्ण अंश है।

  1. यह सबूत है कि यीशू मरियम का एक मात्र पुत्र था, क्योंकि अगर उसके भाई या बहनें होती तो वे उसके साथ होते और यीशू को सूली पर चढ़ाए जाने के समय कम से कम उसके साथ में होते।
  2. यह इसलिए भी एक महत्वपूर्ण अंश है क्योंकि यह उसके अंतिम सात अभिव्यक्तियों (क्रूस पर यीशू के वचन) में से तीसरी है। तीसरी अभिव्यक्ति का महत्व यीशू की चिंता कि कोई उनकी माँ का ध्यान रखे, के परे चला जाता है जब वे अपनी माँ से कहते हैं- “यह आपका पुत्र है” और योहन से “ये तुम्हारी माँ है।” कोई इस पर विश्वास नहीं करेगा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर इतना भी शक्तिशाली नहीं है कि अपनी माँ का ध्यान रख सके जबकि वह स्वर्ग में है। केवल मात्र तार्किक स्पष्टीकरण यह रह जाता है कि हमारे प्रति उनकी दया, खासकर उनके प्रति जिसने अपनी माएँ खो दी हैं या जो माँ को याद करते हैं, यीशू ने हमें दिलासा दी है, यह जानकर कि जो यीशू ने योहन से कहा उसका वही अर्थ हमारे लिए भी है। मरियम हमारी माँ है।

यह सही है कि धन्य कुमारी मरियम दैवी नहीं है क्योंकि उसे हम सब की तरह ही रचा गया था. हालांकि वह निम्नलिखित कारणों से कोई साधारण स्त्री नहीं है।

  1. परमेश्वर किसी पापी के साथ सहवास नहीं कर सकता। हम सब बाइबिल कहानी से स्वर्ग से निष्कासित देवदूत जिसे ज्यादा अच्छी तरह से शैतान के नाम से जाना जाता है (देखें इसैय्याह 14:12-15)। अगर परमेश्वर ने शैतान और उसके अनुयाइयों को धरती पर डाला तो यह मुख्यतः इसलिए क्योंकि परमेश्वर की रचनाओं में से शैतान ने ही सबसे पहला पाप किया था, जो था ईर्ष्या का. कहने का मतलब है परमेश्वर ने ऐसी महिला को उन्हें गर्भावस्था के दौरान 9 महीने अपने गर्भ में रखने के लिए कभी नहीं चुना होगा जो पापिन हो।
  2. देवदूत गैब्रियल ने घोषणा (देखें पेंटिंग नं. 1 (लूकस 1:26-38)) में उनसे कहा “बधाई हो! आप ही हैं जिन्हें इतना अनुग्रह प्राप्त है (महिलाओं में धन्य) प्रभु आपके साथ हैं।”

क्षमा के लिए प्रार्थना

प्रिय सर्वशक्तिमान और पवित्र परमेश्वर,

तुम अपने आप विनम्र और यीशु मसीह में मानवीय हो गये हो.
तुम्हारा दिव्य प्रकाश हमारी आत्माओं और
दिलों के अंधेरे को प्रकाशित करने आया
और हमें अनंत मृत्यु से बचाने आया
हमने धरती पर हमारे बीच तुम्हारी उपस्थिति की महिमा गाने की बजाय
तुम्हारा तिरस्कार किया, अस्वीकार किया और क्रूस पर चढ़ाया
अब तक हम हर रोज आप को क्रूस पर चढ़ाते रहे आपके आदेश न मान कर।
लेकिन अपने अनंत प्रेम और क्षमा के साथ आपने क्रूस पर अपना
खून बहाना स्वीकार किया हमारे पापों को साफ करने के लिए।

हे पिता, मैने आपकी आज्ञा की उपेक्षा करके चोट पहुँचाई है
अपने कृत्यों, कर्मों, विचारों और वचनों से।
मैं जानता हूँ मैं आपकी दया के लायक नहीं.
प्रभु आपसे माँगता हूँ मेरे जाने-अनजाने पापों को क्षमा कर दो।
मैं विनती करता हूँ आपसे मेरे रक्षक बन कर मेरे दिल में आओ।
मैं कहता हूँ इस पल से आप मुझे निर्देशन दो।
इस दिन से मैं प्रतिज्ञा करता हूँ आपकी आवाज सुनने और आज्ञा मानने की।
धन्यवाद, यीशू मुझे अनंत जीवन दिया आपने
क्रूस पर जब अपना खून बहाया।

आमीन

 

 

 
  

 हमारे प्रभु की जिंदगी

परिचय 1 - उद्घोषणाएँ 2 - यीशु का जन्म 3 - मिस्र को पलायन
4 - डॉक्टरों के साथ मंदिर में 5 - प्रथम 4 शिष्य 6 - काना में विवाह 7 - यीशू द्वारा विधवा के पुत्र को पुनर्जीवन प्रदान करना
8 - 5000 लोगों को खिलाना 9 - अंतिम रात्रिभोजन 10 - यहूदा द्वारा विश्वासघात 11 - यीशु का निरादर
12 - सलीब पर चढ़ाना और मृत्यु 13 - यीशु का पुनर्जीवन 14 - उत्थान वचन को फैलाना

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पवित्र त्रिमूर्ति
क्या हम भगवान की कोशिका हैं?


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