Pierre Bittar French Impressionist Artist  
 

 

अक्तूबर 19, 2011

पेंटिंग नं. 9

अंतिम रात्रिभोजन

The Last Supper

मत्ती 26:17-29
17 अखमीरी रोटी के पर्व के पहले दिन, चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे; "तू कहां चाहता है कि हम तेरे लिये फसह खाने की तैयारी करें?"
18 उसने कहा," नगर में फलाने के पास जाकर उससे कहो, कि गुरू कहता है, कि मेरा समय निकट है, मैं अपने चेलों के साथ तेरे यहां पर्व मनाऊंगा।"
19 सो चेलों ने यीशु की आज्ञा मानी, और फसह तैयार किया।
20 जब सांझ हुई, तो वह बारहों के साथ भोजन करने के लिये बैठा।
21 जब वे खा रहे थे, तो उसने कहा," मैं तुमसे सच कहता हूं, कि तुम में से एक मुझे पकड़वाएगा।"
22 इस पर वे बहुत उदास हुए, और हर एक उससे पूछने लगा," हे गुरू, क्या वह मैं हूं?"
23 उसने उत्तर दिया," जिसने मेरे साथ थाली में हाथ डाला है, वही मुझे पकड़वाएगा।"
24 मनुष्य का पुत्र तो जैसा उसके विषय में लिखा है, जाता ही है; परन्तु उस मनुष्य के लिए शोक है जिसके द्वारा मनुष्य का पुत्र पकड़वाया जाता है: यदि उस मनुष्य का जन्म न होता, तो उसके लिये भला होता।
25 तब उसके पकड़वाने वाले यहूदा ने कहा" हे रब्बी, क्या वह मैं हूं?" उसने उससे कहा, "तू कह चुका"
26 जब वे खा रहे थे, तो यीशु ने रोटी ली, और आशीष मांग कर तोड़ी, और चेलों को दे कर कहा," लो, खाओ; यह मेरी देह है।"
27 फिर उसने कटोरा ले कर, धन्यवाद किया, और उन्हें दे कर कहा, "तुम सब इस में से पीओ।"
28 क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिये पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है।
29 मैं तुम से कहता हूं, कि दाख का यह रस उस दिन तक कभी न पीऊंगा, जब तक तुम्हारे साथ अपने पिता के राज्य में नया न पीऊं॥"

इसे अंतिम रात्रिभोजन कहा जाता है क्योंकि यहा अंतिम खाना था जो यीशू ने अपनी गिरफ़्तारी, सूली पर चढाए जाने, मृत्यु, पुनर्जीवन, और स्वर्ग में उत्थान से पहले अपने शिष्यों के साथ खाया था।
यह पृथ्वी पर अपना मिशन जो सभी मानव पापों को धोने के लिए सूली पर अपना रक्त बहाना था, को पूरा करने से पहले का भी अंतिम खाना था।

यह इस खाने के दौरान था कि यीशू ने अपने अनुयाइयों को आशा प्रदान की थी जब उसने कहा, “मेरे पिता ने मुझे राज्य प्रदान किया है, इसलिए मैं तुम्हें यह वरदान देता हूँ कि तुम मेरे राज्य में मेरी मेज’ पर खाओगे-पियोगे और सिंहासनों पर बैठ कर इस्राएल के बारह वंशों का न्याय करोगे।” (लूकस 22:29-30)
यह भी इस खाने के दौरान ही था कि यीशू ने अपने अनुयाइयों को समस्त मानव जाति की ओर से किए गए अपने शरीर और रक्त के बलिदान की याद दिलाई थी. यीशू के निर्देश के अनुसार अंतिम रात्रिभोजन पर एक अरब से अधिक इसाई अपने गिरजाघरों में युहरिस्ट (परम प्रसाद) (पवित्र भोज) मनाते हैं।

 

 
  

 हमारे प्रभु की जिंदगी

परिचय 1 - उद्घोषणाएँ 2 - यीशु का जन्म 3 - मिस्र को पलायन
4 - डॉक्टरों के साथ मंदिर में 5 - प्रथम 4 शिष्य 6 - काना में विवाह 7 - यीशू द्वारा विधवा के पुत्र को पुनर्जीवन प्रदान करना
8 - 5000 लोगों को खिलाना 9 - अंतिम रात्रिभोजन 10 - यहूदा द्वारा विश्वासघात 11 - यीशु का निरादर
12 - सलीब पर चढ़ाना और मृत्यु 13 - यीशु का पुनर्जीवन 14 - उत्थान वचन को फैलाना

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पवित्र त्रिमूर्ति
क्या हम भगवान की कोशिका हैं?


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