Pierre Bittar French Impressionist Artist  
 

 

पवित्र त्रिमूर्ति

संदेह विश्वास का दुश्मन है। यदि दूर नहीं किया गया, यह हमारे मन में बढ़ेगा और हमारे विश्वास को नष्ट कर देगा। इस तरह के नुकसान से बचने का सबसे अच्छा तरीका है सवाल पूछना और हमारे शक को नष्ट करने में सक्षम संतोषजनक जवाब जवाबों की तलाश करना।

परमेश्वर का त्रिमूर्ति क्या है?

ईसाई धर्म एक पवित्र त्रिमूर्ति पर आधारित है जो है: पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा। सभी तीनों एक और केवल परमेश्वर में हैं। एक त्रयात्मक परमेश्वर।

मानवीय समझ या भाषाओं के लिए एक लेकिन त्रयात्मक परमेश्वर की सुंदरता और विराटता को व्यक्त करना कठिन होगा।

एक परिष्कृत विषय की व्याख्या करने के लिए सबसे अच्छा तरीका एक सरल उदाहरण जिसे हम समझ सकें, का उपयोग करना है, फिर इसको विकसित करें और धीरे-धीरे इसे मुख्य विषय सामग्री के लिए अनुकूलित करें।

3 मोमबत्तियों का उदाहरण

दृष्टांत

परमेश्वर

यद्यपि तीन मोमबत्तियाँ हैं लेकिन लौ एक है। लौ का सार है: 
ऊष्मा और
प्रकाश।

Three Candles

परमेश्वर एक है, हालांकि वह पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा की त्रिमूर्ति है। परमेश्वर का सार है:

प्रेम
=
ऊष्मा और
बुद्धिमत्ता
=
प्रकाश।.

 

     

3 मोमबत्तियाँ या तो एक लौ हो सकती हैं या उन्हें अलग किया जा सकता है और हर एक में ऊष्मा और प्रकाश का एक ही सार है जो लौ के लिए अद्वितीय है।

इसलिए हालांकि पहली मोमबत्ती में लौ है, दूसरी मोमबत्ती में लौ है और तीसरी मोमबत्ती में एक लौ है, लेकिन जब उनको एकीकृत करते हैं तो उनकी केवल एक लौ होती है।

Father, Son, Holy Spirit
 
Father, Son, Holy Spirit
 
Father, Son, Holy Spirit

पवित्र त्रिमूर्ति को एक परमेश्वर में एकीकृत किया जा सकता है या अलग किया जा सकता है और प्रत्येक में एक ही प्रेम और बुद्धिमत्ता का सार होगा जो परमेश्वर के लिए अद्वित्तीय है।

इसलिए हलांकि
पिता परमेश्वर है, 
पुत्र परमेश्वर है, 
पवित्र आत्मा परमेश्वर है, 
लेकिन जब वे अकीकृत होते हैं तो एक और केवल एक परमेश्वर होता है।

     

3 मोमबत्तियाँ या तो एक लौ हो सकती हैं या उन्हें अलग किया जा सकता है और हर एक में ऊष्मा और प्रकाश का एक ही सार है जो लौ के लिए अद्वितीय है।

इसलिए हालांकि पहली मोमबत्ती में लौ है, दूसरी मोमबत्ती में लौ है और तीसरी मोमबत्ती में एक लौ है, लेकिन जब उनको एकीकृत करते हैं तो उनकी केवल एक लौ होती है।

3 Candles

जब परमेश्वर का पुत्र मानव (यशायाह 9:16) बन गया "... एक बच्चे के पैदा होता है और वह ... कहलाया जाएगा सर्वशक्तिशाली
भगवान, अनन्त पिता.हमारे प्रभु के जीवन में घोषणा और यीशु के जन्म की नंबर 1 और 2 चित्रों को देखें )

अपने पिता के पास लौटने से पहले, यीशु ने यूहन्ना 15:26 में पवित्र आत्मा अधिवक्ता)को भेजने का वादा किया" जब अधिवक्ता आयेगा, जिसे मैं पिता परमेश्वर के पास से भेजुंगा.... सच्चाई की भावना, जो पिता परमेश्वर की ओर से आयेगी....वो मेरे बारे में गवाही देगा।"


परमेश्वर की पवित्र त्रिमूर्ति के बारे में उपर्युक्त स्पष्टीकरण की एक अच्छी समझ के बाद, चलो चलते हैं और पुराने विधान के साथ-साथ नए विधान से परमेश्वर की पवित्र त्रिमूर्ति के संबंध में कुछ छंद पढ़ते हैं।

पुराने विधान में परमेश्वर ने पहले पृष्ठ के शीर्ष पर स्वयं को हमारे सामने प्रकट किया है, मानो हम समझलें, अग्रिम, वह है कौन।

1:1-3 उत्पत्ति में:

  1. प्रारंभ में ईश्वर ने स्वर्ग और पृथ्वी की सृष्टि की।
  2. ... और ईश्वर की आत्मा सागर पर विचर रही थी।
  3. और परमेश्वर ने कहा (परमेश्वर का वचन), "प्रकाश हो जाए" और प्रकाश हो गया।

जैसा कि हम देख सकते हैं:

छंद 1 में परमेश्वर (पिता) का उल्लेख हुआ है, छंद 2 में परमेश्वर की आत्मा (पवित्रा आत्मा) का, और छंद 3 में परमेश्वर के वचन (परमेश्वर ने कहा) का। परमेश्वर का वचन = यीशु

जब परमेश्वर हमें, हमारे और हम जैसे सर्वनाम का उपयोग करके बहुवचन में बोलता है, यह समझा जाता है कि पवित्र त्रिमूर्ति बोल रही है - पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा।

कुछ को लगता है कि हो सकता है कि हमें, हमारे और हम जैसे सर्वनाम का उपयोग, परमेश्वर और उनके स्वर्गदूतों के लिए किया गया है। यह सच नहीं हो सकता क्योंकि स्वर्गदूत परमेश्वर की रचना हैं न कि रचयिता। इसलिए जब परमेश्वर ने कहा, "हमें हमारी छवि में मानव जाति बनानी चाहिए," हमें और हमारे का जो उल्लेख किया गया है वह निश्चित रूप से यीशू और पवित्र आत्मा हैं जो परमेश्वर के साथ मिल कर पवित्र त्रिमूर्ति बनाते हैं।

चलिए अब हमें पुराने विधान में से छंद पढ़ने चाहिए जिनमें परमेश्वर इन बहुवचन सर्वनामों का उपयोग कर रहे हैं।

उत्पत्ति 1:26
तब ईश्वर ने कहा, ''हम मनुष्य को अपना प्रतिरूप बनायें, यह हमारे सदृश हो। वह समुद्र की मछलियों, आकाश के पक्षियों घरेलू और जंगली जानवरों और जमीन पर रेंगने वाले सब जीव-जन्तुओं पर शासन करें।''

 

उत्पत्ति 3:22
फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा,"मनुष्य भले बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है:इसलिथे अब ऐसा न हो, कि वह हाथ बढ़ाकर जीवन के वृझ का फल भी तोड़ के खा लेऔर सदा जीवित रहे।"

 

उत्पत्ति 11:7
इसलिये आओ, हम उतर के उनकी भाषा में बड़ी गड़बड़ी डालें, कि वे एक दूसरे की बोली को न समझ सकें।”

 

इसायाह 6:8
तब मैं ने प्रभु का यह वचन सुना, मैं किस को भेंजूं, और हमारी ओर से कौन जाएगा? तब मैं ने कहा, मैं यहां हूं! मुझे भेज!”


नए विधान में कुछ छंद उन स्थितियों का स्पष्टीकरण करते हैं जिन में पवित्र त्रिमूर्ति – पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का एक साथ उल्लेख किया गया है।

 

मैथ्थियु28:19
इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो ,
कुछ अन्य छंदों में त्रिमूर्ति की उपस्थिति दृश्य में प्रकट होती है।

 

मैथ्थियु 3:16-17
16 और यीशु बपतिस्मा ले कर तुरन्त पानी में से ऊपर आया, और देखो, उसके लिये आकाश खुल गया; और उसने परमेश्वर के आत्मा को कबूतर की नाईं उतरते और अपने ऊपर आते देखा। 17 और देखो, यह आकाशवाणी हुई, कि" यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं अत्यन्त प्रसन्न हूं॥"

पवित्र त्रिमूर्ति को समझना महत्वपूर्ण है... अच्छी समझ के बिना बाइबिल के कुत्छ छंद भ्रामक हो सकते हैं। उनमें से कुछ नीचे दिए गए हैं।

इसायाह7:14
इस कारण प्रभु आप ही तुमको एक चिन्ह देगा। सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानूएल रखेगी।

 इमानुएअल का अर्थ है परमेश्वर हमारे साथ है। (इम=साथ, मान=हमें, परमेश्वर=उएल)

टिप्पणीः उपर्युक्त छंद में इसायाह ने यीशू को परमेश्वर कह कर पुकारा। अब हम जानते हैं कि यीशू को परमेश्वर क्यों कहा गया (क्योंकि अगर पवित्र त्रिमूर्ति से अलग किया जाता है तो यीशू परमेश्वर है)

 

इसायाह 9:6
क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्भुत युक्ति करनेवाला पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा।

टिप्पणीः यीशू को अमर पिता बुलाना इस की पुष्टि है कि पवित्र त्रिमूर्ति उसी सार के साथ एक परमेश्वर है, वे एक दूसरे में है।

 

इसायाह 25:9
और उस समय यह कहा जाएगा, "देखो, हमारा परमेश्वर यही है; हम इसी की बाट जोहते आए हैं, कि वह हमारा उद्धार करे। यहोवाय ही है; हम उसकी बाट जोहते आए हैं। हम उससे उद्धार पा कर मगन और आनन्दित होंगे."

टिप्पणीः परमेश्वर और प्रभु पुकारने के अलावा इसायाह ने यीशू को रक्षक भी पुकारा।

 

इसायाह 40:3
किसी की पुकार सुनाई देती है, जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिए अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो।

टिप्पणीः यहाँ इसायाह योहन बपतिस्ता द्वारा यीशू के आगमन की घोषणा करने की भविष्यवाणी कर रहा था।

 

यूहन्ना 1:1-5
और वचन परमेश्वर था। 2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उसमें से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 4 उसमें जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण नहीं किया है।

टिप्पणीः अपने सुसमाचार के आरंभ में योहन परमेश्वर पिता और पुत्र के बारे में बोला। उसने यीशू को वचन कहा क्योंकि बिना वचन के कुछ भी नहीं बना था। (ऐसा ही हो, उसने कहा और वह हो गया।– देखें उत्पत्ति) इसायाह ने यीशू को प्रकाश भी कहा जिसका मतलब बुद्धिमत्ता भी है।

 

यूहन्ना 10:30
मैं और पिता एक हैं।

टिप्पणीः यह पवित्र त्रिमूर्ति के एक परमेश्वर होने की एक और पुष्टि है। यह उसकी भी पुष्टि करता है जो इसायाह ने कहा; कि यीशू अमर पिता है।

 

यूहन्ना 14:6
6यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

महत्वपूर्ण नोटः यह संदेश उन लोगों के लिए है जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं लेकिन परमेश्वर की त्रिमूर्ति में नहीं। बिना यीशू के कोई पवित्र त्रिमूर्ति नहीं है इसलिए कोई परमेश्वर नहीं है। (अगर यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कृपया ऊपर वर्णित पवित्र त्रिमूर्ति के वर्णन पर वापस जाएँ)।

 

यूहन्ना14:8-11
8 फिलेप्पुस ने उससे कहा, हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे: यही हमारे लिये बहुत है। 9 यीशु ने उससे कहा; हे फिलेप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूं, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है: तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा। 10 क्या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में हैं? ये बातें जो मैं तुमसे कहता हूं, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है। 11 मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूं; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो।

टिप्पणीः यीशू ने परमेश्वर की त्रिमूर्ति के बारे में बहुत स्पष्ट कर दिया, इसके अलावा उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि उनका हमारे बीच में आना छुपे हुए और अदृश्य परमेश्वर को हमारे सामने प्रकट करना भी था।

 

पवित्र त्रिमूर्ति के महत्वपूर्ण विषय को समाप्त करने के लिए कृपया परमेश्वर ने योहन के निम्नलिखित छंद में जो सत्यापित किया है उसे ध्यानपूर्वक पढ़ें।

यूहन्ना 5:11-13
11और वह गवाही यह है, कि परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है: और यह जीवन उसके पुत्र में है।12जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है॥13मैं ने तुम्हें, जो परमेश्वर के पुत्र के नाम पर विश्वास करते हो, इसलिये लिखा है; कि तुम जानो, कि अनन्त जीवन तुम्हारा है।

 
  

 हमारे प्रभु की जिंदगी

परिचय 1 - उद्घोषणाएँ 2 - यीशु का जन्म 3 - मिस्र को पलायन
4 - डॉक्टरों के साथ मंदिर में 5 - प्रथम 4 शिष्य 6 - काना में विवाह 7 - यीशू द्वारा विधवा के पुत्र को पुनर्जीवन प्रदान करना
8 - 5000 लोगों को खिलाना 9 - अंतिम रात्रिभोजन 10 - यहूदा द्वारा विश्वासघात 11 - यीशु का निरादर
12 - सलीब पर चढ़ाना और मृत्यु 13 - यीशु का पुनर्जीवन 14 - उत्थान वचन को फैलाना

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पवित्र त्रिमूर्ति
क्या हम भगवान की कोशिका हैं?


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