Pierre Bittar French Impressionist Artist  
 

 

 

नवंबर 16, 2011

पेंटिंग नं. 13


यीशू को दफ़नाने की भविष्यवाणी

इसायाह 53:9 में “उसकी कब्र विधर्मियों के बीच बनायी गयी और वह धनियों के साथ दफ़नाया गया है...”

उपर्युक्त भविष्यवाणी जो यीशू की मृत्यु से 700 साल पहले घोषित की गई थी, वह मत्ती 27:57-60 में पूरी हुई।

57 संध्या हो जाने पर अरिमथिया का एक धनी सज्जन आया। उसका नाम यूसूफ था और वह भी ईसा का शिष्य बन गया था।
58 उसने पिलातुस के पास जा कर ईसा का शव माँगा और पिलातुस ने आदेश दिया कि शव उसे सौंप दिया जाये।
59 यूसुफ ने शव ले जा कर उसे स्वच्छ छालटी के कफ़न में लपेटा
60 और अपनी कब्र में रख दिया, जिसे उसने हाल में चट्टान में खुदवाया था और वह कब्र के द्वार पर बड़ा पत्थर लुढ़का कर चला गया।

 

यीशू का पुनर्जीवन

The Resurrection of Jesus


योहन  20:11-18
11 परन्तु मरियम रोती हुई कब्र के पास ही बाहर खड़ी रही और रोतेरोते कब्र को देखने किए लिए झुकी
12 और देखा दो स्वर्गदूतों को उज्ज़वल कपड़े पहने हुए एक को सिरहाने और दूसरे को पैताने पर बैठे देखा, जहां यीशु की लाश पड़ी थी।
13 उन्होंने उससे कहा, "हे नारी, तू क्यों रोती है? उसने उनसे कहा," वे मेरे प्रभु को उठा ले गए और मैं नहीं जानती कि उसे कहां रखा है।"
14 यह कह कर वह पीछे फिरी और यीशु को खड़े देखा और न पहचाना कि यह यीशु है।
15 यीशु ने उससे कहा, "हे नारी तू क्यों रोती है? किस को ढूंढ़ती है?" उसने माली समझकर उससे कहा, "हे महाराज, यदि तूने उसे उठा लिया है तो मुझसे कह कि उसे कहां रखा है और मैं उसे ले जाऊंगी।
16 यीशु ने उससे कहा," मरियम!" उसने पीछे फिर कर उससे इब्रानी में कहा, "रब्बूनी!"(अर्थात "गुरू").
17 यीशु ने उससे कहा," मुझे मत छू क्योंकि मैं अब तक पिता के पास ऊपर नहीं गया, परन्तु मेरे भाइयों के पास जाकर उनसे कह दे, कि" मैं अपने पिता, और तुम्हारे पिता, और अपने परमेश्वर और तुम्हारे परमेश्वर के पास ऊपर जाता हूं।"
18 मरियम मगदलीनी ने जा कर चेलों को बताया, कि"मैंने प्रभु को देखा है" और उसने मुझसे ये बातें कहीं।

यीशू की मृत्यु और पुनर्जीवन के बारे में बहुत सी भविष्यवाणियाँ भी पूर्ण हुई थी, जैसे उदाहरण के लिएः

मत्ती 12:40, “जिस प्रकार योनस तीन दिन और तीन रात मच्छ के पेट में रहा, उसी प्रकार मानव पुत्र भी तीन दिन और तीन रात पृथ्वी के गर्भ में रहेगा।”

यीशू के शिष्य पूरी तरह से भूल गए लगते हैं जो यीशू ने उन्हें अपने पुनर्जीवन के बारे में बताया था। योहन 2:18-19 में, “यहूदियों ने ईसा से कहा, ‘‘आप हमें कौन-सा चमत्कार दिखा सकते हैं, जिससे हम यह जानें कि आप को ऐसा करने का अधिकार है?'' ईसा ने उन्हें उत्तर दिया, ‘‘इस मन्दिर को ढा दो और मैं इसे तीन दिनों के अन्दर फिर खड़ा कर दूँगा''। मंदिर से यीशू का मतलब था उनका शरीर और इसे ढहाने का अर्थ था उन्हें जान से मारना और उसके खड़ा कर देने का मतलब था उनका पुनर्जीवन।

मत्ती 16:21 में, “उस समय से ईसा अपने शिष्यों को यह समझाने लगे कि मुझे येरुसालेम जाना होगा; नेताओं, महायाजकों और शास्त्रियों की ओर से बहुत दुःख उठाना, मार डाला जाना और तीसरे दिन जी उठना होगा।”

मत्ती 17:22-23 में, यीशू ने दूसरी बार अपनी मृत्यु और पुनर्जीवन की भविष्यवाणी की थी। “जब वे गलीलियों में साथ-साथ धूमते थे; तो ईसा ने अपने शिष्यों से कहा, ''मानव पुत्र मनुष्यों के हवाले कर दिया जावेगा। वे उसे मार डालेंगे और वह तीसरे दिन जी उठेगा। यह सुनकर शिष्यों को बहुत दुःख हुआ।”

मत्ती 20:17-19 में भी, यीशू ने तीसरी बार अपनी मृत्यु और पुनर्जीवन की भविष्यवाणी की थी। ईसा येरुसालेम के मार्ग पर आगे बढ रहे थे। बारहों को अलग ले जा कर उन्होंने रास्ते में उन से कहा, ''देखो, हम येरुसालेम जा रहे हैं। मानव पुत्र महायाजकों और शास्त्रियों के हवाले कर दिया जायेगा।वे उसे प्राणदण्ड की आज्ञा सुना कर गैर-यहूदियों के हवाले कर देंगे, जिससे वे उसका उपहास करें, उसे कोडे’ लगायें और क्रूस पर चढायें; लेकिन तीसरे दिन वह जी उठेगा।''

उम्मीद है, हम भूलेंगे नहीं और हमेशा यीशू मसीह की मृत्यु और पुनर्जीवन में हमेशा विश्वास रखेंगे, क्योंकि यह विश्वास हमारी मुक्ति के लिए आवश्यक है और निम्नलिखित छंद में इस पर जोर दिया गया है।

रोमियों 10:9  “क्योंकि यदि आप लोग मुख से स्वीकार करते हैं कि ईसा प्रभु हैं और हृदय से विश्वास करते हैं कि ईश्वर ने उन्हें मृतकों में से जिलाया, तो आप को मुक्ति प्राप्त होगी।”


 

 

 
  

 हमारे प्रभु की जिंदगी

परिचय 1 - उद्घोषणाएँ 2 - यीशु का जन्म 3 - मिस्र को पलायन
4 - डॉक्टरों के साथ मंदिर में 5 - प्रथम 4 शिष्य 6 - काना में विवाह 7 - यीशू द्वारा विधवा के पुत्र को पुनर्जीवन प्रदान करना
8 - 5000 लोगों को खिलाना 9 - अंतिम रात्रिभोजन 10 - यहूदा द्वारा विश्वासघात 11 - यीशु का निरादर
12 - सलीब पर चढ़ाना और मृत्यु 13 - यीशु का पुनर्जीवन 14 - उत्थान वचन को फैलाना

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पवित्र त्रिमूर्ति
क्या हम भगवान की कोशिका हैं?


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