Pierre Bittar French Impressionist Artist  
 

 

 

सितंबर28, 2011

पेंटिंग नं. 6

काना में विवाह

काना में शादी हमारे प्रभु यीशु मसीह के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ था. कई लोगों को आमंत्रित किया गया. यह एक सामाजिक घटना थी. जो कई दिनों तक चलती थी. यह जानना महत्वपूर्ण है कि मेजबान के लिए यह एक सार्वजनिक अपमान होता है जब भोजन या शराब खत्म हो जाता है.

The Marriage in Cana

योहन 2:1-11
1 फिर तीसरे दिन गलील के काना में किसी का ब्याह था, और यीशु की माता भी वहां थी।
2 और यीशु और उसके चेले भी उस ब्याह में नेवते गए थे।
3 जब दाख रस घट गया, तो यीशु की माता ने उससे कहा, कि उनके पास दाख रस नहीं रहा।
4 यीशु ने उससे कहा, हे महिला मुझे तुझसे क्या काम? अभी मेरा समय नहीं आया।
5 उसकी माता ने सेवकों से कहा, जो कुछ वह तुमसे कहे, वही करना।
6 वहां यहूदियों के शुद्ध करने की रीति के अनुसार पत्थर के छ: मटके धढे थे, जिनमें दो दो, तीन तीन मन समाता था।
7 यीशु ने उनसे कहा, मटकों में पानी भर दो: सो उन्होंने मुँहा मुँह भर दिया।
8 तब उसने उनसे कहा, अब निकाल कर भोज के प्रधान के पास ले जाओ।वे ले गए,
9 जब भोज के प्रधान ने वह पानी चखा, जो दाख रस बन गया था, और नहीं जानता था, कि वह कहां से आया हे, ( परन्तु जिन सेवकों ने पानी निकाला था, वे जानते थे) तो भोज के प्रधान ने दूल्हे को बुलाकर, उससेकहा।
10 हर एक मनुष्य पहले अच्छा दाख रस देता है और जब लोग पीकर छक जाते हैं, तब मध्यम देताहै; परन्तु तूने अच्छा दाख रस अब तक रख छोड़ा है।
11 यीशु ने गलील के काना में अपना यह पहला चिन्ह दिखा कर अपनी महिमा प्रगट की और उसके चेलों ने उस पर विश्वास किया।

यीशू निश्चित नहीं थे कि उनका समय आ चुका है। दूसरी तरफ उनकी माँ, मरियम, निश्चित थी। वह जानती थी कि वह तैयार था, अन्यथा उन्होंने उससे यह नहीं कहा होता, उनके पास अब और शराब नहीं है, जो कि एक प्रेरणा थी एक चमत्कार करने के लिए। जब यीशू ने उत्तर दिया, महिला, मुझे क्यों शामिल करती हो? मेरा समय अभी नहीं आया है, इस बात का सबूत है कि वे आश्वस्त नहीं थे। उनका उत्तर न तो अशिष्ट था और न असम्मानजनक। जब उन्होंने अपनी माँ को महिला कह कर पुकारा तो वे उनके लिए एक आदर की उपाधि का उपयोग कर रहे थे, जो कि उस समय आप तौर पर प्रयोग की जाती थी। मरियम आश्वस्त नहीं थी जब यीशू ने उत्तर दिया कि मेरा समय अभी नहीं आया है। इसी कारण उन्होंने नौकरों को निर्देश दिया कि जो वह कहता है वही करो। इस क्षण यीशू अपने नए शिष्यों (पीटर, आंद्रे, योहन, जेम्स और फिलिप) जो उनकी सेवा में थे। यदि चमत्कार प्रकट होने में विफल रहा तो, उनके निराश होने की संभावना के कारण झिझक सकते थे। लेकिन बिना किसी झिझक के यीशू ने नौकरों से कहा, जारों को पानी से भर दो, और चमत्कार हो गया जिस क्षण उन्होंने कहा, अब इसमें से थोड़ा सा बाहर निकालो और इसे दावत के स्वामी के पास ले जाओ।

 

 
  

 हमारे प्रभु की जिंदगी

परिचय 1 - उद्घोषणाएँ 2 - यीशु का जन्म 3 - मिस्र को पलायन
4 - डॉक्टरों के साथ मंदिर में 5 - प्रथम 4 शिष्य 6 - काना में विवाह 7 - यीशू द्वारा विधवा के पुत्र को पुनर्जीवन प्रदान करना
8 - 5000 लोगों को खिलाना 9 - अंतिम रात्रिभोजन 10 - यहूदा द्वारा विश्वासघात 11 - यीशु का निरादर
12 - सलीब पर चढ़ाना और मृत्यु 13 - यीशु का पुनर्जीवन 14 - उत्थान वचन को फैलाना

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पवित्र त्रिमूर्ति
क्या हम भगवान की कोशिका हैं?


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